होटल-रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा? कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप, ब्लैक में मिल रही गैस; जानें क्या है बड़ी वजह।

LPG Cylinder Shortage: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सीधे निशाना बनाया है, और अब कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर ताला लग गया है। होटल और रेस्टोरेंट संचालक बढ़ी हुई कीमत देने को तैयार बैठे हैं, मगर गैस ही नहीं मिल रही है। यह संकट सिर्फ ईंधन का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का है।

LPG Cylinder Shortage: कॉमर्शियल LPG की किल्लत

देश के कई प्रमुख राज्यों में कॉमर्शियल एलपीजी (एलपीजी) की सप्लाई अचानक रोक दी गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान गैस के अभाव में संकट का सामना कर रहे हैं।

सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल सिलेंडरों की डिस्पैच पर रोक लगा दी है। इससे शादी-विवाह के सीजन में जहां एक तरफ मेहमानों की भूख मिटाने का संकट है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में होटल एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि हाल ही में 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1773 रुपये से बढ़ाकर 1888 रुपये कर दी गई थी। वे इस बढ़ी हुई कीमत पर भी गैस खरीदने को तैयार थे, लेकिन सप्लाई ही बंद हो गई। शादी के मौसम में यह फैसला उनके लिए घातक साबित हो रहा है।

राजस्थान

राजस्थान में भी स्थिति लगभग समान है। यहां होटल-रेस्टोरेंट से जुड़े व्यापारियों का अनुमान है कि करीब 3 लाख लोग इस व्यवसाय से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। गैस का कोई वैकल्पिक साधन नहीं होने से मैरिज गार्डन से लेकर छोटे ढाबों तक सब प्रभावित हैं। तेल कंपनियों का अचानक लिया गया यह निर्णय उद्योग जगत के लिए परेशानी का सबब बन गया है।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में स्थिति और भी गंभीर है। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में कॉमर्शियल गैस की कटौती इतनी तेज है कि पुणे नगर निगम ने गैस से चलने वाले शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। राज्य में करीब 9,000 रेस्टोरेंट और बार पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।

पंजाब

पंजाब में 8 मार्च से ही 19 किलो और बड़े इंडस्ट्रियल सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है। डिस्ट्रीब्यूटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन से पहले न लें। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हैदराबाद समेत कई शहरों में बुकिंग फ्रीज कर दी गई है। छोटे होटल और भोजनालय संचालकों ने सरकार से अपील की है कि सप्लाई बहाल की जाए, क्योंकि इससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। छत्तीसगढ़ में डीलर्स को निर्देश हैं कि एजुकेशनल संस्थानों और अस्पतालों को छोड़कर किसी अन्य को कॉमर्शियल सिलेंडर न दिए जाएं।

इस संकट की जड़ पश्चिम एशिया में चल रही जंग है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, लगभग बंद हो चुका है। यह जलमार्ग दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 प्रतिशत हिस्सा ले जाता है। भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलपीजी इसी रास्ते से आयात करता है।

ईरान पर अमेरिका-इज़राइल की स्ट्राइक के जवाब में ड्रोन हमलों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। कतर, जो भारत को 40 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई करता है, अपने प्लांट बंद करने को मजबूर हो गया। मिडिल ईस्ट से आने वाले एलपीजी शिपमेंट में भारी देरी हो रही है, जिससे घरेलू बाजार में किल्लत पैदा हो गई है।

सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश (LPG Cylinder Shortage)

सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीनों तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की हाई-लेवल कमेटी गठित की है, जो सप्लाई की समीक्षा कर रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आपातकालीन प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल मुख्य रूप से घरेलू सिलेंडरों के लिए करें। घरेलू गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी पर ओटीपी या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

अब एक सिलेंडर डिलीवर होने के 25 दिन बाद ही दूसरा बुक किया जा सकता है। इंडियन ऑयल के वरिष्ठ अधिकारी के.एम. ठाकुर ने कहा है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग से बचें। सरकार अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है।

कीमतों में भी तेजी आई है। 7 मार्च से घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर 60 रुपये महंगा होकर दिल्ली में 913 रुपये का हो गया है। कॉमर्शियल 19 किलो सिलेंडर में 115 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो अब 1883 रुपये का है। यह बढ़ोतरी करीब एक साल बाद हुई है, लेकिन वैश्विक संकट के चलते अपरिहार्य हो गई है।

यह संकट बताता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा कितनी नाजुक है। मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाना, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देना और आपातकालीन भंडारण मजबूत करना समय की मांग है।

फिलहाल होटल-रेस्टोरेंट संचालक उम्मीद की किरण तलाश रहे हैं कि कब सप्लाई बहाल होगी और उनकी चूल्हें फिर जलेंगी। लाखों परिवारों की रोटी इस गैस से जुड़ी है, और इस संकट ने एक बार फिर याद दिलाया कि ऊर्जा सिर्फ ईंधन नहीं, जीवन का आधार है।

Disclaimer: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। वास्तविक स्थिति समय और स्थान के अनुसार अलग हो सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोत या विभाग से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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